24 अप्रैल 2016 को बच्चों की रेस थी जयपुर में जनपथ पर, यही कुछ 3 - 4 हजार बच्चों ने हिस्सा लिया होगा, फिर उन के पेरेंट्स और स्कूल के लोग भी थे लगभग उतने ही। हमेशा की तरह में तो दौड़ने से रहा लेकिन घूम कर सारी व्यवस्था तो देख ही सकते थे, तो घूमने लगा रोड पर, व्यवस्था बहुत बढ़िया की गयी थी हर थोड़ी दूरी पर पानी की छोटी -छोटी बॉटल्स के काउंटर्स थे, स्टार्टिंग पॉइंट पर एनर्जी ड्रिंक की व्यवस्था थी, मेडिकल रूम था सजावट भी अच्छी थी बस अनाउंसमेंट सिस्टम गड़बड़ था, रेस जिस रोड पर हो रही थी उस के किनारे वाले खम्बों पर गुब्बारे लगाये गए थे, बहुत सुन्दर लग रहे थे।
रेस शुरू हुयी सब से पहले 10 KM वालों की फिर 5 KM वालों की और फिर 3 KM वाले बच्चों की, रेस शुरू होने के 5-7 मिनट बाद में सड़क पर आगे बढ़ा जहाँ बच्चे गए थे पूरी सड़क के साइड में प्लास्टिक की बॉटल्स पड़ी हुयी थी में ने मन ही मन सोचा "वाह रे विकास " इतने में ही कुछ बच्चे दौड़ते हुए आये हाथों में थैला लिए हुए और उन बॉटल्स को उठा के बचा हुआ पानी खाली कर के अपने - अपने थैलों में डालने लग गये। 2-4 मिनट में ही सारी रोड साफ़ हो गयी। मुझे बड़े मजे आ रहे थे उन्हें देख कर, और इसी लिए मैंने उन के साथ एक सेल्फी भी ले ली
उनमें से एक एक छोटा बच्चा दूसरे से बोला " ओये देख कतरा सारा गुब्बारा लाग रया छ खंबा पे। " दूसरा बोला " नरा ऊंचा छ पण हाथ कॉन आवे। "
मैंने वो गुब्बारे निकाल कर बच्चों को देना शुरू कर दिया, बच्चे भी खूब सारे से थे सभी मेरे पास आ गए फिर क्या, पहले एक खम्बा फिर दूसरा और जैसे ही तीसरे खम्बे का नंबर आया एक सिक्यूरिटी गार्ड सीटी बजाने लगा।
मुझे थोड़ी हसीं आई और में उस गार्ड के पास गया और बोला - " भाई ये सब अमीरों के चोंचले हैं, देखा तुम ने ये बच्चे मोदी के 'स्वच्छ भारत अभियान' का पालन करने वाले हैं, थोड़े गुब्बारों से खेल लेंगे तो किसी का क्या ही बिगड़ जाएगा?"
उस ने बोला " साहब हम तो गुलाम हैं, हमें तो हुक्म बजाना है। "
में बोला " गुलाम नहीं हो, काम कर रहे हो और इस बात के पैसे ले रहे हो। पर ये सोचो कि इसी गुलामी की सोच के चक्कर में तुम किन की ख़ुशी छीन रहे हो और तब जब की उस से किसी और का नुक्सान भी नहीं हो रहा।"
पता नहीं ये उस गार्ड के लिए समझना मुश्किल था या आसान लेकिन उस ने मुझे खुद की एक कहानी सुनायी जिस में मेरी ही उम्र के एक अमीर सभ्य लड़के ने कैसे उस पर जुल्म किया था और उस के पैसे रोक लिए थे और पिटाई भी की थी क्योकि उस ने धूप में गेट पर खड़े होने की जगह साइड में एक पेड़ के नीचे खड़े होने की गलती करी थी और उस लड़के की कार के लिए गेट खुलने में देर हो गयी थी।
खेर इस बहाने मैंने 2 खम्बों के गुब्बारे और निकाल लिए और बच्चों को दे दिए और वो दौड़ते हुए उन थैलों और गुब्बारों को ले कर चले गए।
Happy Ending :)